चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- सम्यक दर्शी आत्मा को दुख अच्छा लगता है किन्तु पाप नहीं
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि जिन शासन ज्ञान से चलता है। ज्ञान है तो इस जगत में सब कुछ है और ज्ञान नहीं तो कुछ भी नहीं। उन्होंने कहा कि हर जगह हम अवगुण ही अवगुण देखते हैं और यह सब हो रहा है ज्ञान के अभाव की वजह से।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि आज लोग ज्यादा दुखी हैं और संवेदनाओं की वजह से यह हो रहा है, यदि यही संवेदनाएं जब आध्यात्मिक स्तर पर आ जाए तो जीव सुखी हो जाता है। पाप हर जगह है और ज्ञान का काम है पाप को खत्म करना। उन्होंने कहा कि हम सब दिखावटी धर्म करते हैं। एक तरफ हम पांच -दस हज़ार रूपये दान कर देते हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे अधार्मिक कार्य जारी रहते हैं।
मुनि श्री वीरभद्र विराग जी ने कहा कि हमने ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई पुरुषार्थ नहीं किया, इसलिए हमारी क्रियाएं जड़वत है। उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शी आत्मा को दुख खराब नहीं लगता, बल्कि उसे तो दुख अच्छा लगता है किन्तु पाप नहीं। उन्होंने कहा कि पाप खत्म हो जाएगा तो दुख तो आएगा ही नहीं। उन्होंने कहा कि जिसको दुख खराब लगे और वह उसे हटाने की कोशिश में लग जाए तो समझो कि वह मोक्ष मार्ग से भटक गया है। दुख को सहन करने की शक्ति होनी चाहिए। जीवन में छोटे-छोटे दुख आते रहते हैं क्योंकि जीव की इतनी कैपेसिटी ही नहीं है कि वह बड़े दुखों को सह सके। ज्ञान से दुख, दुख के समान नहीं लगता। उन्होंने कहा कि हमने अपनी आत्मा के उत्थान का ज्ञान प्राप्त ही नहीं किया।
मुनि श्री वीरभद्र विराग जी ने कहा कि यह आत्मा के कल्याण की कमाई का सीजन है और हम लौकिक धन के पीछे पड़े हैं! हमें आत्मा की कल्याण के लिए समय निकालना ही होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान आएगा तो आचरण आएगा ही। हमें आत्म कल्याण के लिए कम से कम एक घंटे का समय प्रतिदिन निकालना ही होगा तभी हम आत्म कल्याण के मार्ग में निर्बाध गति से आगे बढ़ पाएंगे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
