चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- मन के परिणामों का असर एकेंद्रियों पर भी पड़ता है
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि जो जितना सरल बनता है मोक्ष का मार्ग भी उसके लिए उतना सरल बनता है। अपने मन के परिणामों का असर एकेंद्रियों (पेड़ -पौधों) पर भी पड़ता है, इसलिए अपने मन के परिणामों को पवित्र एवं अच्छा बनाना होगा।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान कहा कि फोटो खिंचवाते समय आपने देखा होगा कि फोटोग्राफर आपको स्माइल करने के लिए कहता है। उसके बाद जो फोटो खींची जाती है वह फोटो खिंचवाने वाले व्यक्ति से भी सुंदर आती है। इसी तरह अच्छा बोलने से बिगड़ा काम भी बन जाता है। इसलिए हमेशा अच्छा बोलें। उन्होंने कहा कि यदि आप मन में अच्छा सोचते हुए पेड़ पौधों में पानी डालते हैं तो आप देखेंगे कि पेड़ पौधे अच्छे से पल्लवित हो रहे हैं, वहीं आप किसी का बुरा सोचते हुए पानी डालते हैं तो पेड़ पौधों की ग्रोथ वैसी नहीं हो पाती। इसका साफ मतलब है कि आपके मन के परिणामों का असर एकेंद्रियों पर भी पड़ता है।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि मुस्कुराते रहने और अच्छा बोलने से हमारा क्या जाता है किंतु एक बात तय कि इसका रिटर्न अवश्य अच्छा मिलता है। जो सरल बनता है मोक्ष भी उसके लिए सरल बनता है। हंसता चेहरा रखने से लाभ ही लाभ है। उन्होंने कहा कि जो काम हम ऐसे नहीं करवा सकते, सरल रहकर हम वह काम आसानी से करवा सकते हैं। सरल रहने से हमें मोक्ष का मार्ग क्लीयर मिलेगा। मुनिश्री ने कहा कि मधुमक्खियों ने डंक मारने का और फूलों का रस इकट्ठा करने का ही काम किया है, इसलिए वह हमेशा दुखी ही रहती है। काफी मेहनत कर मधुमक्खियां फूलों का रस एकत्र करती है। उसके द्वारा रस एकत्र करने के बाद उसके छत्ते के नीचे लोग शहद लेने के लिए धुंआ करते हैं और इस धुंएं में कई मधुमक्खियां मर जाती है और कुछ को जगह छोड़कर भागना पड़ता है, उनकी मेहनत बेकार जाती है और लोग शहद को निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए व्यक्ति को हमेशा नम्र रहना चाहिए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
