युकां नेता ऋषि शास्त्री ने कहा- पेयजल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे प्रशासन
राजनांदगांव। इंदौर में दूषित पेयजल के कारण 15 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए युवा नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने राजनांदगांव नगर निगम और जिला प्रशासन को चेताया है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी त्रासदी यहां भी दोहराई जा सकती है। पानी जो जीवन देता है, वही जहर बन जाए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी।
शास्त्री ने कहा कि जिन लोगों ने जीवन बचाने के लिए पानी पिया, वही पानी उनके लिए मौत का कारण बन गया। उन्होंने कहा किसी घर का मन्नतों के बाद जन्मा चिराग बुझ गया तो कहीं दो वक्त की रोटी कमाने वाला पिता अपनी आखिरी सांस ले गया। यह केवल एक घटना नहीं बल्कि सिस्टम की घोर विफलता है। शास्त्री ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस कंपनी पर 210 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और जिसने पहले पेयजल संयंत्र का मेंटेनेंस अधूरा छोड़ दिया था उसी कंपनी को दोबारा जिम्मेदारी सौंपना जनता के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने के बजाय आंख मूंदकर ठेके देना आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ है।
ऋषि शास्त्री ने मोहारा वाटर वर्क्स एनीकट और पुराने पुलिया क्षेत्र का उलेख करते हुए कहा कि वहां वाहन धुलाई के कारण पानी में तेल, डीज़ल और अन्य जहरीले तत्व मिल रहे हैं। इसके अलावा प्लांट से लेकर घरों तक जाने वाली पाइपलाइन और कनेक्शनों में लीकेज की लगातार शिकायतें मिल रही हैं लेकिन उनके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। शास्त्री ने प्रशासन से जल स्रोतों के आसपास वाहन धुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने, पेयजल की नियमित लैब जांच कराई जाने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाने, लीकेज वाली पाइपलाइन और कनेक्शनों की तत्काल मरम्मत कराए जाने, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी कंपनी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ऋषि शास्त्री ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा की अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और किसी भी प्रकार की जनहानि हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि इंदौर जैसी त्रासदी से सबक लेते हुए राजनांदगांव प्रशासन को पेयजल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि स्वच्छ पानी केवल सुविधा नहीं बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
