राजनांदगांव। एक जून से शुरु होने वाला मानसून सीजन 30 सितंबर गुजरने के साथ ही समाप्त हो गया है। अब होने वाली बारिश मानसून कोटे में नहीं जोड़ी जाएगी, यह बारिश पोस्ट मानसून कहलाएगी। इस बार भी मानसून सामान्य रहा है, पिछले दस सालों के औसत के मुकाबले जिले में इस बार चार फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। हालांकि इसके बावजूद तीन जिले सामान्य बारिश से पिछड़ गए है। इधर मौसम विभाग ने अगले चार दिन तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। विभाग की तरफ से अविभाजित जिले के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।
भू-अभिलेख विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राजनांदगांव जिले में इस मानसून सीजन कुल 974 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं जिले के लिए बारिश का औसत आंकड़ा 930 मिमी है, ऐसे में चार फीसदी अधिक बारिश हुई है। हालांकि मानसून समाप्त होने के बाद भी बारिश की गतिविधियों में कमी आती नहीं दिखाई दे रही है। मिली जानकारी के अनुसार मानसून की विदाई में अभी लगभग दो सप्ताह का समय लग सकता है। ऐसे में दशहरा सहित आने वाले अन्य त्योहारों में भी बारिश खलल डाल सकती है। खेती करने वाले किसानों के लिए भी इस बार मानसून बेहतर रहा है, हालांकि बीच में लंबे ब्रेक के चलते फसल प्रभावित हुई। परन्तु पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश से खेती को भी राहत मिल गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 970 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इनमें राजनांदगांव ब्लॉक में 1295 मिमी, डोंगरगढ़ ब्लॉक में 1050 मिमी, एलबी नगर में 940 मिमी, घुमका में 797 मिमी, छुरिया में 794 मिमी, कुमरदा में 967 मिमी और डोंगरगांव में 977 मिमी बारिश हुई है। एलबी नगर, छुरिया और घुमका ब्लॉक में ही सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। बाकी ब्लॉक सामान्य से बेहतर स्थिति में है।
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले चार दिन बारिश की गतिविधियां बने रहेगी। विभाग के अनुसार आज यानि एक अक्टूबर को उत्तर बंगाल की खाड़ी के और आसपास के मध्य भाग में एक लो प्रेशर एरिया बन सकता है, जिसके चलते बारिश ज्यादा होगी। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की वापसी रेखा गुजरात से उत्तर प्रदेश होते हुए उत्तर भारत तक सक्रिय है। दक्षिण ओडिशा और उससे लगे छत्तीसगढ़ क्षेत्र में बना दबाव अगले 24 घंटों में कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित हो सकती है।
मिली जानकारी के अनुसार इस बार सामान्य मानसून रहने का असर बांधों में भी दिखाई दिया है। जिले के सभी बांध में पर्याप्त जलभराव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार रूसे जलाशय में 96 फीसदी, ढारा में 80 फीसदी, पिपरिया, मटिया मोती और मडियान जलाशय में शत प्रतिशत, मोंगरा बैराज में 90 फीसदी, सूखनाला में 86 और घुमरिया जलाशय में 95 फीसदी जलभराव है।
