अपने चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- कभी किसी भी जीव के प्रति दुर्भाव न रखें
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि कभी किसी जीव के प्रति दुर्भाव ना रखें, क्योंकि पता नहीं अगले भव में वह जीव किस रूप में जन्म लें।
जैन बगीचे में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि सात्विक जीवन जीयें और फल आदि का सेवन करें क्योंकि यह शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है और जल्द पच भी जाता है। उन्होंने बताया कि पांचवा एवं छठवां आरा 21 – 21 हज़ार वर्ष का होगा। उन्होंने बताया कि छठवें आरे में महापदम स्वामी का अवतार होगा और 72 साल की उम्र में उनका महानिर्वाण होगा। उनके दो साथी विमलनाथ एवं देव सेन होंगे। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे आरा बढ़ते जाएंगे वैसे ऐसे लोगों की उम्र भी बढ़ती जाएगी। इसी के साथ-साथ शरीर की काया भी बढ़ती जाएगी।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि जो आत्मा पाप करती है तो उसे दुखों की प्राप्ति होती है। कर्मों का फल अवश्य भुगतना पड़ता है। अपने जीवन में हम क्या-क्या बदलाव कर सकते हैं, इस पर चिंतन करें और जीवन में बदलाव करते हुए आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
