चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- लोगों के बीच में आपकी इमेज कैसी है, इस पर ध्यान देकर पुरुषार्थ करें
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि हमारे विचारों के अंदर पवित्रता नहीं है इसलिए निगेटिव विचार आते हैं। घटनाएं तो घटती ही रहेगी, घटनाएं हमारे हाथ नहीं है किंतु उसकी परिणिति हमारे हाथ में है।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान कहा कि व्यक्ति स्वार्थवश एक दूसरे से जुड़ा रहता है किंतु यदि इंसानियत जाग जाए और लोग एक दूसरे का निस्वार्थ भाव से सहयोग करने लगे तो क्या बात है। उन्होंने कहा कि लोग आपके बारे में क्या कहते हैं, लोगों के बीच में आपकी इमेज कैसी है, इस पर ध्यान देकर पुरुषार्थ करना चाहिए। हमें अपने स्वभाव में आना बहुत ही जरूरी है।
वीरभद्र मुनि श्री ने कहा कि जो भी पाप कर्म होता है, उसका भुगतान करना ही होता है। उन्होंने कहा कि यह भव मिला है, इसका सदुपयोग अवश्य करें। आत्मा के अंदर अनंत सुख है अनुभव करने के लिए हमें पुरुषार्थ करना ही चाहिए तभी हमारा यह जीवन सार्थक होगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
