नाबालिग बालिका के यौन शोषण से जन्मे बच्चे को गलत जानकारी देकर अपना बच्चा बता कर जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था
बच्चे को किया गया बरामद
बोरतलाव पुलिस की कार्रवाई
राजनांदगाँव। नाबालिग लड़की से एक नाबालिग लड़के द्वारा शारीरिक संबंध बनाने से जन्में बच्चे को गलत जानकारी देकर अपना बच्चा बता कर जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाली दम्पत्ति को बोरतलाव पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इससे पहले नाबालिग का यौन शोषण करने वाले नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। पुलिस ने नवजात बच्चे को विधिक संरक्षक हेतु बाल विकास समिति को सौंप दिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थिया पीड़िता की मां ने चौकी चिचोला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बच्ची को गांव का ही एक लड़का बहला-फुसला कर शारीरिक संबंध बनाया है जिससे वह गर्भवती हो गई थी। लोकलाज के भय से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। अपनी लड़की को अपने रिश्तेदार के घर छोड़ दी थी, जहां बच्चे की डिलीवरी पश्चात पीड़िता के चाचा चाची ने बच्चे को किसी अन्य जरूरतमंद को दे दिया था।
बोरतलाव पुलिस द्वारा पूर्व में पीड़िता के साथ यौन शोषण करने वाले विधि से संघर्षरत बालक को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। इस संबंध में अग्रिम विवेचना में पाया गया कि नवजात बच्चे को पीड़िता के परिजन अपने पास रखना नहीं चाहते थे। नाबालिक के परिजनों ने नवजात को जन्म के तत्काल बाद एक जरूरतमंद दंपत्ति को दे दिया था। उस दम्पत्ति ने नवजात को इलाज हेतु कुमुद मोहबे मेमोरियल अस्पताल राजनांदगांव में स्वयं का बच्चा बता कर भर्ती कराया था। अस्पताल के स्टाफ जिन्हें इस संबंध में जानकारी थी, उनके द्वारा नगर निगम में नवजात बच्चे को कुमुद मोहबे मेमोरियल अस्पताल में जन्मा बता कर नगर निगम में जानकारी भेज कर जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया था।
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक, एसडीओपी डोंगरगढ़ आशीष कुंजाम के मार्गदर्शन में कुमुद मोहबे मेमोरियल हॉस्पिटल से आवश्यक साक्ष्य संकलन किया गया। प्रकरण में धारा 62(1), 337, 338, 339 bns, 21 पॉक्सो एक्ट, 80 किशोर न्याय अधिनियम जोडा़ गया। आरोपी दंपत्ति ने पूछताछ में अपना जुर्म स्वीकार किया। उनके कब्जे से जन्म प्रमाण पत्र, नोटरी शपथ पत्र जब्त किया गया और नवजात को बरामद किया गया। पुलिस द्वारा आरोपी दंपत्ति को न्यायिक अभिरक्षा हेतु न्यायालय पेश किया गया। बच्चे के विधिक संरक्षक हेतु निर्णय लेने बाल विकास समित राजनांदगांव के समक्ष पेश किया गया। मामले में अन्य आरोपियो पर विधि सम्मत कार्यवाही की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि नाबालिग प्रसूता की शहर के एक निजी नर्सिंग होम में डिलीवरी कराकर उसके नवजात शिशु को कथित तौर पर दूसरे को दे दिया गया था। नवजात शिशु को अपना बच्चा बताकर उस दम्पत्ति ने उसे शहर के कुमुद मोहबे मेमोरियल अस्पताल में अपना बच्चा बताकर भर्ती कराया था और उसका जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया था। जानकारी के अनुसार 8 सितंबर 2025 को नाबालिग की डिलीवरी एक महिला डॉक्टर द्वारा प्राइवेट हॉस्पिटल में कराई गई थी। नियम के अनुसार किसी नाबालिग के गर्भवती होने की सूचना पुलिस को देना अनिवार्य है लेकिन डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना देने के बजाय गुपचुप डिलीवरी कराकर कानून की आंखों में धूल झोंकी। अब पुलिस की जांच जैसे जैसे आगे बढे़गी, इस मामले में और भी लोग लपेटे में आ सकते हैं।
इस कार्रवाई में निरीक्षक अवनीश कुमार श्रीवास, प्रधान आरक्षक रोहित पड़ौती, आरक्षक वेद प्रकाश रत्नाकर, नितिन यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
