छत्तीसगढ़ में रमन सरकार के समय से है प्रतिबंध पर अब भी बिक रहा
राजनांदगाँव में फिट पान राज और सितार का बाजार दौड़ रहा
राजनांदगाँव। जर्दायुक्त गुटखा। बरसों से पूरे छत्तीसगढ़ में जर्दायुक्त गुटखा का व्यापार चल रहा था। किसम किसम के व्यापारी इस धंधे में कूद रहे थे और जमकर मुनाफा कूट रहे थे। फिर एक दिन अचानक सरकार ने प्रदेश में इस पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी। पर क्या हुआ? क्या इस पर प्रतिबंध लगा?? जवाब है लगा, पर सिर्फ रिकार्ड में। हकीकत में आज भी पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा धड़ल्ले से बिक रहा है और इस पर रोक लगाने का काम करने वाले सरकारी विभाग कभी-कभी छिटपुट कार्रवाई कर शांत बैठ जा रहे हैं।
बात बहुत पुरानी है। तब की है जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी और मुख्यमंत्री राजनांदगाँव के विधायक डा. रमन सिंह थे। उनकी सरकार आने के काफी पहले से यानि छत्तीसगढ़ बनने के पहले से जर्दायुक्त गुटखा का व्यापार दौड़ रहा था। इसके निर्माता से लेकर इसकी मार्केटिंग करने वाले व्यापारी और पान ठेलों व किराना दुकानों में इसकी खुदरा बिक्री करने वाले दुकानदार सब जमकर नोट कमा रहे थे। फिर एक दिन प्रदेश के मुखिया की नजर में यह आया और उनकी सरकार ने छत्तीसगढ़ में जर्दायुक्त गुटखा पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी।
प्रतिबंध यानि इसका व्यापार बंद। होना तो यही चाहिए था लेकिन हुआ क्या। जर्दायुक्त गुटखा बनाने वाली कुछ कंपनियों ने गुटखा और जर्दा दोनों को अलग-अलग बनाकर बेचना शुरू कर दिया, पर कुछ कंपनियों ने सरकार के प्रतिबंध की खिल्लियाँ उडा़ते हुए अपना कारोबार जारी रखा। हाल ऐसा हो गया कि पूरे जर्दायुक्त गुटखा बेचने वालों (अवैध काम करने वालों) ने कई फैक्टरियां डाल लीं। यानि उनका कारोबार चलता रहा। राजनांदगाँव में जर्दायुक्त गुटखा खाने वालों को यहीं उत्पादित जर्दायुक्त गुटखा मिलने लगा, रायपुर में रहने वालों को रायपुर में उत्पादित और बस्तर में रहने वालों को बस्तर में उत्पदित जर्दायुक्त गुटखा मिलता रहा।
सरकार ने प्रतिबंध लगाया तो इस आदेश का पालन करने और कराने का काम जमीनी अमले को करना चाहिए। बस यहीं असली घालमेल शुरू हो गया। जमीनी अमले ने सरकार के आदेश के पालन की जमीन पर सिर्फ औपचारिकताओं का निर्वहन किया और छिटपुट कार्रवाई करते रहे। परदे के पीछे बडा़ खेल (रोकडे़ की वसूली) होता रहा और जर्दायुक्त गुटखा बिकता रहा।
ऐसा कब तक हुआ। छत्तीसगढ़ में सरकार बदली। कांग्रेस की सरकार आई। भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने। अब प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा का धंधा बंद कराने मुख्यमंत्री तो खुद बाजार में जाकर या पान ठेलों में जाकर कार्रवाई करेंगे नहीं। यह काम उसी जमीनी अमले को करना था जो पिछली भाजपा सरकार के समय भी था। पर इस समय भी जमीनी अमले ने किया। सिर्फ खानापूर्ति की। जर्दायुक्त गुटखा बेचने वालों के कारोबार में कोई विपरीत प्रभाव नहीं पडा़।
एक बार फिर छत्तीसगढ़ में चुनाव हुए और कांग्रेस को पराजित कर भाजपा की फिर वापसी हुई। विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री बने। नए मुख्यमंत्री के साथ ही पिछली भाजपा सरकार के समय के कुछ को छोड़कर बिल्कुल नया मंत्रिमंडल बना। इस सरकार के समय भी सरकार की मंशा साफ है कि प्रदेश में कोई भी अवैध काम नहीं होना चाहिए। कई मोर्चों पर सरकार की यह मंशा कारगर भी है और काम भी कर रही है लेकिन जर्दायुक्त गुटखा के मसले पर सरकार के मुखिया और पूरी सरकार की भी नहीं चल रही है। निचला अमला सरकार की आंखों में अभी भी धूल ही झोंक रहा है।
सरकार का जमीनी अमला दिखाने के लिए कभी-कभी जर्दायुक्त गुटखा बेचने वाले कुछ छोटे किराना दुकानदारों और पान ठेलों पर कार्रवाई कर अपना कर्तव्य पूरा कर रहा है। इस अवैध काम को अंजाम देने वाले सरगनाओं तक अमले के हाथ नहीं पहुंच रहे हैं। यदि कभी कोई सरगना पकड़ में आ भी गया तो वो साफ बचकर निकल जा रहा है। हाल यह हो गया है कि सरकारी अमले में ठोस, ईमानदारी पूर्वक और जमीनी काम करने वाले अफसरों के होने के बाद भी इन पर कोई रोक नहीं लग रही है।
पूरे प्रदेश का तो पता नहीं पर राजनांदगाँव में फिट पान राज और सितार नाम से दो प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा धड़ल्ले से बिन रहे हैं। हर किराना दुकान और हर पान ठेलों में यह उपलब्ध है। कई ठेलों में तो इन प्रतिबंधित गुटखा को बकायदा सामने लटकाकर बेचा जा रहा है। हैरानी और चिंता की बात है कि जो दो प्रकार के गुटखा यहां बिक रहे हैं उनमें प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखा फिट पान राज के पाउच में न ही उसे बनाने वाली कंपनी का कोई नाम छपा है और न ही कोई पता। सितार के पाउच में जरूर एक कंपनी का नाम है और एक व्यक्ति की तस्वीर है पर यह यह भी प्रतिबंधित गुटखा है। पर बिक दोनों रहे हैं। साफ है कि ये कंपनियां सीधे तौर पर इसे खाने वालों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही हैं।
