चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- “पंचम आरे ” में मर्यादाओं का कोई*महत्व नहीं रह जाएगा
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि परमात्मा ने गौतम स्वामी को “पांचवें आरे” के बारे में बताया कि इस आरे में मर्यादाओं का कोई महत्व नहीं रह जाएगा और हर कोई एक-दूसरे को पीड़ा पहुंचाने की कोशिश करेगा।
जैन बगीचे में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि परमात्मा ने गौतम स्वामी को “पंचम आरे” की जानकारी देते हुए बताया था कि इस युग में व्यक्ति की उम्र 130 वर्ष से घटते-घटते अंतिम काल में मात्र 20 वर्ष रह जाएगी। झूठे और कपटियों का बोलबाला होगा। वे धनवान होंगे और सच्चे ईमानदार गरीब होंगे। उनके पास पेट भरने के लिए भी पर्याप्त भोजन नहीं होगा। वात्सल्य की कमी होगी और व्यक्ति एक दूसरे को पीड़ा पहुंचाने की कोशिश करेगा। मर्यादाएं धूमिल हो जाएगी। पुत्रवधू जेठ, ससुर आदि के सामने अमर्यादित बातें करेंगी, मंच पर खुलेआम नाचने लगेगी। मर्यादाएं उन्हें बांधकर नहीं रख पाएंगी।
*मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आगे बताया कि “पंचम आरे” में गाय जैसे उत्तम जानवरों का लोग मांस भक्षण करने लगेंगे। धर्म, श्रद्धा, आयुष्य और शरीर का महत्व घट जाएगा। मर्यादा नहीं होने कारण घर में संस्कारों की सुरक्षा चली जाएगी। मां बाप के साथ संयुक्त परिवार कम देखने को मिलेगा। लूटपाट आम बात होगी। इस युग में भी साधना कर अनेक जीव अपने आप को आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ा पाएंगे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
