चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- प्रभु से आत्म कल्याण की चीज ना मांग कर पतन की चीज मांगते हैं!
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि खेलने की इच्छा तो सभी लोग रखते हैं किंतु कुछ लोग ही खेल पाते हैं, उसमें भी कोई प्रतियोगिता हो तो एक-दो या कुछ लोग ही भाग ले पाते हैं। लोगों को नहीं मिला तो उसकी शिकायत प्रभु से रहती है लेकिन जो मिला उसके लिए वह प्रभु को धन्यवाद नहीं देते।
जैन बगीचे में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि करोड़ों लोग रोज भूखे सोते हैं किंतु प्रभु ने मुझे सब कुछ दिया है, लोग ज्ञान नहीं होने के कारण इस पर विचार नहीं कर पाते। प्रभु से हम आत्मा के कल्याण की चीज ना मांग कर पतन की चीज मांगते हैं! उन्होंने कहा कि हमारी इच्छा यदि सभी की सभी पूरी हो जाए तो दुनिया में हाहाकार मच जाए, क्योंकि हमको भी मालूम है कि हमारी इच्छाएं क्या-क्या और कैसी -कैसी हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रभु ने हमें योग्यता दी है।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आगे कहा कि हमने अपने परमात्मा को ही नहीं पहचाना, एक बार पहचान लिया तो हमारे सारे काम अपने आप हो जाएंगे। योग्यता बिना कोई वस्तु मिल जाए तो इसका दुरुपयोग ही होगा, सदुपयोग नहीं होगा। मनुष्य भव मिल गया, देवगुरु धर्म मिल गया, बुद्धि मिल गयी और आगे चलकर देवगुरु धर्म का सानिध्य मिल गया फिर भी हम कहते हैं कि परमात्मा ने हमें कुछ नहीं दिया! छोटी-छोटी चीजों के लिए हम बहस करते हैं परंतु इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें परमात्मा ने जो दिया है,काफी दिया और उसके लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए हमें आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ना चाहिए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
