चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- आवश्यकता हो तभी नए वस्त्र धारण करना चाहिए
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि मन में समाधि होगी तभी आत्मा शक्तिशाली होगी और आत्मा शक्तिशाली होगी तभी हम मोक्ष प्राप्त कर सकेंगे।
जैन बगीचे में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए परमात्मा ने 22 परिषह (सहनीय बातों) का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि मच्छर काटे तो उसे सहन करना चाहिए। हमारी गतिविधियों से किसी भी जीव की जान नहीं जानी चाहिए। मुनि श्री ने आगे कहा कि इसी तरह आवश्यक हो तभी नया वस्त्र धारण करना चाहिए। ऐसे ही आवश्यक हो तभी किसी नई वस्तु का इस्तेमाल करना चाहिए। प्रतिकूल परिस्थिति तो आने वाली ही है किंतु ऐसी परिस्थिति से घबराना नहीं चाहिए।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि साधुओं को चाहिए कि वे किसी भी एकांत स्थान पर स्त्रियों से बात ना करें। यदि करना भी हो तो ऐसे स्थान पर करें जहां सबकी नजर हो। इसके अलावा एक निश्चित दूरी बनाए रखें। अंधेरे में पूजा या आराधना ना करें। संयम का पालन करें। साधुओं को हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए और किसी प्रकार का भाव मन में नहीं रहना चाहिए। कोई आक्रोश पैदा करना चाहे तो भी आक्रोशित ना हो और मन में समाधि रखें एवं आराधना करते हुए आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ते रहना चाहिए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
