धान पर अब केवल 1% मंडी शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क से पूर्ण छूट
राजनांदगांव। राज्य सरकार ने पोहा उद्योग से जुड़े व्यापारियों और प्रसंस्करण इकाइयों को बड़ी राहत दी है। अब पोहा निर्माण हेतु उपयोग में लाए जाने वाले धान पर केवल 1 प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाएगा तथा कृषक कल्याण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की गई है। यह निर्णय कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग की अधिसूचना दिनांक 6 नवंबर 2025 से प्रभावशील हो गया है।
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 की धारा 69 (1) के तहत संशोधन करते हुए पूर्व में लागू 1.5% मंडी शुल्क को घटाकर 1% कर दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक ने आदेश जारी कर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर एवं जगदलपुर के संभागीय कार्यालयों को निर्देशित किया है कि अधिनस्थ मंडी समितियों को इस अधिसूचना से अवगत कराया जाए और तदनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
व्यापार जगत में स्वागत
इस निर्णय का कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) एवं पोहा मिल उत्पादक संघ ने स्वागत किया है। कैट के जिला अध्यक्ष राजू डागा ने कहा कि पोहा उद्योग लंबे समय से मंडी शुल्क में कमी की मांग कर रहा था। राज्य सरकार का यह निर्णय व्यापारियों के हित में ऐतिहासिक कदम है। कैट के सदस्य संजय तेजवानी ने कहा कि इससे उद्योग को वित्तीय राहत मिलेगी, लागत घटेगी और छोटे उत्पादक फिर से प्रतिस्पर्धा में टिक सकेंगे। पोहा उत्पादक विष्णु प्रसाद लोहिया ने कहा कि पोहा उद्योग से जुड़े व्यापारी और किसान दोनों को लाभ होगा। यह निर्णय ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती देगा। कैट पदाधिकारियों भावेश अग्रवाल, सोहन देवांगन, राजेन्द्र जैन, अशोक पांडे और राजेश जैन सहित अन्य ने कहा कि मंडी टैक्स में छूट से किसानों को उनकी उपज का उचित दाम प्राप्त होगा। वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा मिलेगा और दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा करना अब आसान होगा।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
इस निर्णय से न केवल प्रसंस्करण उद्योग को राहत मिलेगी बल्कि किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ पहुंचेगा। पोहा निर्माण हेतु धान की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।
