राजा विरेन्द्र बहादूर सिंह के नाम से कला के क्षेत्र में राज्य स्तरीय सम्मान की मांग
राजनांदगांव। शहर के चक्रधर कथक कल्याण केन्द्र के संस्थापक और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के संस्थापक राजा विरेन्द्र बहादुर सिंह के नाम से राज्य स्तरीय पुरस्कार दिए जाने की मांग राज्य सरकार से की है।
डॉ. सिन्हा ने कहा की खैरागढ़ रियासत के दानवीर राजा विरेन्द्र बहादूर सिंह के नाम से कला के क्षेत्र में उत्सकृष्ठ कार्य करने वाले कला साधकों, कला विद, कला गुरुओं, कला संस्थानों (संगीत महाविद्यालयों), शास्त्रीय नृत्य, संगीत एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में शिक्षण प्रशिक्षण देने वाले कलाकारों को छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा चक्रधर सम्मान के अतिरिक्त राजा विरेन्द्र बहादूर सिंह एवं रानी पद्मावती के नाम से शास्त्रीय एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को प्रदान करने के की आवश्यकता महसूस कला बिरादरी एवं बुद्धिजीवियों द्वारा किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में शास्त्रीय एवं ललित कलाओं के शिक्षण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए छत्तीसगढ़ के दो रियासतों रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह और खैरागढ़ के राजा विरेन्द्र बहादूर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी का योगदान अग्रणीय है। खैरागढ़ राजा विरेन्द्र बहादूर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी ने अपनी पुत्री राज कुमारी इंदिरा की स्मृति में संगीत एवं ललित कलाओं के शिक्षण संरक्षण, संवर्धन के लिए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपना पैतृक राजमहल को वर्ष 1956 में दान कर दिया था। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ एशिया का प्रथम संगीत विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त है।
चक्रधर कथक कल्याण केन्द्र राजनांदगांव के संस्थापक एवं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों से इस बावत आग्रह किया है।
