डोंगरगढ़ में केंद्रीय मंत्री ने किया आचार्य विद्यासागर संग्रहालय का भूमिपूजन, चांदी का सिक्का और डाक लिफाफा किया विमोचन
मां बम्लेश्वरी मंदिर में लगाई हाजिरी
राजनांदगांव। केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धर्मनगरी डोंगरगढ़ में चंद्रगिरि तीर्थक्षेत्र स्थित विद्यासागरोदय समाधि स्थल पर आयोजित संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के द्वितीय समाधि स्मृति महामहोत्सव में हिस्सा लिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने आचार्य श्री को भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज वर्तमान में होकर भी वर्धमान थे, देह में होकर भी विदेह थे और लोक में होकर भी अलौकिक थे।
इस प्रवास के दौरान चौहान ने मां बम्लेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और देवी माँ से देश एवं प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना भी की।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने आचार्य विद्यासागर संग्रहालय का शिलान्यास एवं भूमिपूजन किया। साथ ही, भारत सरकार की ओर से आचार्य श्री की स्मृति में चांदी के सिक्के और 210 डाक लिफाफों का विमोचन भी किया गया। उन्होंने समाधि स्थल पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
जनसमूह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आचार्य श्री का स्मरण करते ही उनका करुणा भरा चेहरा और आशीष देते हाथ याद आ जाते हैं। आज डोंगरगढ़ की धरा पर आकर मैं धन्य हो गया, लेकिन मन में एक टीस है कि काश उन्हें सुनने का अवसर मिलता। उनके बिना यहां सूनापन है, लेकिन उनकी उपस्थिति का अहसास हर कण में है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री जिस शिला पर चरण रखते, वह पूज्य हो जाती थी। वे शिष्यों के लिए साध्य होकर भी साधन थे।
केंद्रीय मंत्री ने आचार्य श्री के विचारों को अपने जीवन की दिशा बताते हुए कहा कि हमें स्वदेशी को जीवन का संस्कार बनाना चाहिए। उन्होंने राजभाषा हिंदी के सम्मान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं का विदेशों में पलायन रुकना चाहिए। जैन समाज ने राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दिया है। सृष्टि की वेदना को दृष्टि की ओर मोड़ना ही जैनत्व है।
समाधि महोत्सव के बाद केंद्रीय मंत्री चौहान मां बम्लेश्वरी के दरबार पहुंचे। उन्होंने वहां विधि-विधान से पूजा की। इस अवसर पर उनके साथ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और सांसद संतोष पाण्डेय भी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डोंगरगढ़ अद्भुत संगम स्थली है, जहाँ एक ओर चंद्रगिरि जैन तीर्थ है, तो दूसरी ओर मां बम्लेश्वरी और प्रज्ञागिरि बौद्ध तीर्थ स्थल भी है।
कार्यक्रम में प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ की छात्राओं ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘प्राचीन गौरव’ विषय पर मनमोहक प्रस्तुति दी। इस दौरान ‘संस्कृति शासनाचार्य’, ‘लोकोत्तर महापुरुष का अलौकिक दर्शन’ और ‘लॉस्ट जैन ट्राइब्स ऑफ ट्रीकलिंगा’ जैसी पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर विधायक दलेश्वर साहू, पूर्व विधायक रामजी भारती, कलेक्टर जितेन्द्र यादव, एसपी अंकिता शर्मा सहित जैन समाज के प्रबुद्धजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
