चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि वीरभद्र ने कहा- भीतर सरलता आएगी तभी हम परमात्मा को देख पाएंगे
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि आराधना का रस ही आत्मज्ञान का कारण बनता है। हमें तत्वों को जानने में जिज्ञासा होनी चाहिए। तत्वों को जानने की जिज्ञासा ही हमें आगे बढ़ाएगी।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान कहा कि नींद आती है तो आंख अपने आप बंद हो जाती है। इसी तरह जिस दिन जिज्ञासा होगी तो ज्ञान अपने आप आ जाएगा और ज्ञान आया तो आचरण अपने आप आ जाएगा। उन्होंने कहा कि नींद दो कारणों से आती है या तो व्यक्ति ध्यान में हो या फिर बहुत ज्यादा थकान में हो। अंदर स्वत्व होना चाहिए। मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले सरलता चाहिए। जब तक सरलता नहीं होगी तब तक हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि एक बार हमने किसी के सामने कोई छवि बना ली तो फिर उसे हटाना मुश्किल होता है। कांच के आरपार दिखता है किंतु जब उसमें पारा की परत चढ़ जाती है तो कांच पारदर्शी नहीं रह जाता। इसी तरह हमारे भीतर भी कई परत चढ़ गई है जिसे हटाना जरूरी है। भीतर सरलता आएगी तभी हम परमात्मा को देख पाएंगे। हम किसी की तारीफ करते हैं तो बाहर से ही करते हैं, हृदय से तारीफ करें तो कोई बात है। हमारे मन के साथ-साथ बाह्य आचरण में भी पवित्रता जरूरी है। हमारे विचारों से बाह्य आवरण पर भी फर्क पड़ता है, इसलिए सुपल चाहिए तो भीतर के विचार सही रखें। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
