श्रमिक की बेटी को स्कूटी का तोहफा, पर लाइसेंस के लिए आडे़ आ रही उम्र
राजनांदगांव। अभावों के बीच भी अगर हौसले बुलंद हों, तो सफलता कदम चूमती ही है। यह साबित कर दिखाया है राजनांदगांव के वनांचल ग्राम मातेखेड़ा की बेटी भूमिका साहू ने। एक निर्माणी श्रमिक की बेटी ने कक्षा 10वीं में 97.67% अंक हासिल कर राज्य की मेरिट सूची में 10वां स्थान बनाया है। इस उपलब्धि पर राज्य शासन ने ‘मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत उसे 1 लाख रुपये की राशि और एक स्कूटी देकर सम्मानित किया है। हालांकि स्कूटी चलाने की फिलहाल भूमिका की उम्र नहीं होने के चलते इस पर सवाल भी खडे़ हो रहे हैं।
भूमिका के पिता मनोज साहू भवन निर्माण में मजदूरी करते हैं और छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिक हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद बेटी की पढ़ाई में यह प्रोत्साहन राशि संजीवनी का काम करेगी।
भूमिका कहती है इस मदद से मेरे पिता पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है और अब मैं आगे की पढ़ाई निश्चिंत होकर कर सकूँगी।
निश्चित तौर पर, गरीब और मेधावी छात्रों के सपनों को पंख देने वाली यह योजना सरकार की एक बेहतरीन और संवेदनशील पहल है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। सरकार की मंशा छात्रा को आत्मनिर्भर बनाने की है, लेकिन यहाँ एक बड़ा तकनीकी और कानूनी सवाल खड़ा हो गया है। भूमिका अभी कक्षा 10वीं की छात्रा हैं, यानी उनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। कानूनन वह ‘नाबालिग’ हैं।
मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार गियर वाले दोपहिया वाहन (स्कूटी/बाइक) चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होता है, जो 18 वर्ष पूर्ण होने पर ही बनता है। 16 से 18 वर्ष के किशोरों को केवल ‘बिना गियर’ वाले (50cc से कम) वाहनों का लाइसेंस मिल सकता है, जबकि उपहार में दी गई स्कूटी उच्च क्षमता की है।
यह विरोधाभास और भी गहरा तब हो जाता है जब हम कैलेंडर की ओर देखते हैं। वर्तमान में पूरे प्रदेश में 1 जनवरी से 31 जनवरी तक ‘यातायात सुरक्षा माह’ मनाया जा रहा है।
एक तरफ पुलिस और प्रशासन सड़कों पर लोगों को रोककर हेलमेट और लाइसेंस की जाँच कर रहे हैं और नाबालिगों के वाहन चलाने पर अभिभावकों पर जुर्माना लगा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, प्रशासन स्वयं मंच पर एक नाबालिग छात्रा को वाहन की चाबी सौंप रहा है।
सवाल यह है क्या प्रशासन यह मानकर चल रहा है कि छात्रा यह गाड़ी बिना लाइसेंस के चलाएगी? या फिर यह गाड़ी घर पर तब तक खड़ी रहेगी जब तक भूमिका 18 साल की नहीं हो जाती? यदि छात्रा उत्साह में वाहन लेकर सड़क पर निकलती है और कोई दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
योजना अच्छी, पर सुधार की दरकार
मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य पवित्र है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में व्यावहारिकता और कानून का तालमेल होना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि 10वीं के मेधावी (नाबालिग) छात्रों को वाहन के बजाय उसकी कीमत के बराबर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या अतिरिक्त छात्रवृत्ति दी जा सकती है, जिसे वे बालिग होने पर वाहन खरीदने में उपयोग कर सकें। इससे न केवल उनकी पढ़ाई में मदद मिलेगी, बल्कि सरकार अपने ही बनाए यातायात नियमों के साथ खड़ी नजर आएगी।
