जिला पंचायत सदस्य महेन्द्र यादव ने लगाया आरोप
कहा- समिति प्रबंधकों को अनावरी रिपोर्ट के आधार पर प्रति एकड़ केवल 15 से 17 क्विंटल धान खरीदने का प्रशासन ने दिया आदेश
राजनांदगाँव। जिला पंचायत सदस्य एवं जिला कांग्रेस कमेटी राजनांदगांव (ग्रामीण) के महामंत्री महेंद्र यादव सदस्य ने कहा कि मौजूदा सरकार में किसानों की परेशानियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।
यादव ने कहा कि राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव द्वारा धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर बंद कमरे में समिति प्रबंधकों को यह मौखिक निर्देश दिया गया कि अनावरी रिपोर्ट के आधार पर किसानों से प्रति एकड़ केवल 15 से 17 क्विंटल धान खरीदा जाए। इस तुगलकी आदेश ने किसानों में तीखा रोष पैदा कर दिया है।
यादव ने कहा कि जब-जब प्रदेश में भाजपा की सरकार आती है, किसानों को किसी न किसी आदेश और दमनात्मक प्रक्रिया के जरिए परेशान किया जाता है। कलेक्टर का यह निर्देश दर्शाता है कि सरकार की मंशा किसानों का पूरा धान खरीदने की नहीं है, बल्कि बहाने बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार में किसानों को सम्मान, न्याय और उनकी उपज का पूरा मूल्य मिलता था लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार में किसानों को खरीफ फसल के लिए खाद–बीज के लिए भटकना पड़ा, यहां तक कि आंदोलन करना पड़ा। मजबूरी में किसानों को यूरिया और डीएपी दोगुनी कीमत पर निजी हाथों से खरीदना पड़ा।
यादव ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि कई किसानों की उपज प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक होती है। क्या सरकार कलेक्टर के इस फरमान के अनुसार किसानों की पूरी उपज खरीदेगी? या फिर किसानों को 15–17 क्विंटल तक सीमित कर दिया जाएगा? उन्होंने बताया कि कलेक्टर के निर्देश के बाद कई किसानों ने फोन कर अपनी परेशानी बताई। मौके पर पहुँचने पर एक किसान ने बताया कि उसकी 2 एकड़ 31 डिसमिल जमीन है और वह सामान्यतः 48 क्विंटल धान बेचता था, लेकिन नए निर्देश के बाद समिति ने केवल 40 क्विंटल धान ही खरीदा और बाकी वापस कर दिया।
यादव ने कहा कि यह किसानों के साथ खुला अन्याय है। सरकार की घोषणा के अनुसार पूर्ण क्विंटल धान की खरीदी अनिवार्य है। यदि किसानों का हक़ छीना गया तो वे क्षेत्र के किसानों के साथ सड़क पर उतरकर संघर्ष करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
