कलेक्टोरेट गेट पर ट्रैफिक पुलिस ने अफसरों और बाबूओं का काटा चालान
राजनांदगांव। अक्सर कहा जाता है कि पर उपदेश कुशल बहुतेते। यानी दूसरों को ज्ञान देना बहुत आसान है, लेकिन खुद अमल करना मुश्किल। मगर राजनांदगांव में बुधवार यह कहावत उल्टी पड़ गई। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत कलेक्टोरेट का नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। शहर को नियम-कायदे सिखाने वाले विभाग के कर्मचारी और अधिकारी जब अपनी ही धुन में बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के ऑफिस पधारे, तो गेट पर स्वागत ‘फूलों’ से नहीं, बल्कि ‘500 रुपये के चालान’ से हुआ।
कलेक्टर जितेंद्र यादव ने एक पुरानी कहावत को नए अंदाज में चरितार्थ कर दिया, अपना सुधार, संसार की सबसे बड़ी सेवा है। कलेक्टर साहब का संदेश साफ था कि अगर सिस्टम को सुधारना है, तो शुरुआत घर (कलेक्टोरेट) से ही होनी चाहिए। इसी मंत्र को लेकर ट्रैफिक पुलिस सुबह-सुबह कलेक्टोरेट के द्वार पर मुस्तैद हो गई।
10 से 15 ‘साहबों’ को मिला 500 रुपये का ‘प्रसाद’
नजारा देखने लायक था। कई अधिकारी और कर्मचारी, जो रोज आम जनता को नियमों का पाठ पढ़ाते हैं, आज खुद बिना हेलमेट के दोपहिया और बिना सीट बेल्ट के चार पहिया वाहनों में ‘हवा-हवाई’ होकर आ रहे थे। गेट पर पुलिस को देख कइयों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। किसी ने अरे मैं तो यहीं का स्टाफ हूँ वाला कार्ड खेला, तो किसी ने जल्दी में भूल गया वाला पुराना बहाना बनाया।
लेकिन कलेक्टर साहब के सख्त निर्देशों के आगे किसी की एक न चली। ट्रैफिक टीआई ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर ही जांच टीम तैनात की गई थी। इस औचक निरीक्षण में लगभग 10 से 15 कर्मचारी/अधिकारी नियमों की अनदेखी करते पाए गए। इन सभी पर बिना किसी रियायत के 500-500 रुपये की चालानी कार्रवाई की गई। यानी बुधवार की सुबह इन लोगों के लिए थोड़ी महंगी साबित हुई।
इस कार्रवाई ने पूरे शहर में एक कड़ा और बड़ा संदेश दिया है। जब नियम बनाने और पालन करवाने वाले कलेक्टोरेट परिसर में ही कोताही बर्दाश्त नहीं की जा रही, तो आम जनता की क्या बिसात? राजनांदगांव प्रशासन की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं चाहे वो फाइल पर साइन करने वाला अधिकारी हो या सड़क पर चलने वाला आम नागरिक।
अब उम्मीद है कि कलेक्टोरेट से निकली यह ‘सुधार’ की लहर शहर के हर चौक-चौराहे तक पहुंचेगी। आखिर जब राजा (प्रशासन) ही सुधर जाए, तो प्रजा को हेलमेट पहनने में क्या दिक्कत हो सकती है।
