कई स्कूलों में न सरकारी की तरह वेतन मिलता, न कटता पीएफ
जहां पीएफ कटता है और पूरा वेतन मिलता है, वहां भी वेतन को ले लिया जाता है वापस
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूल बच्चों के अभिभावकों से फीस, कापी, किताब और अन्य आयोजनों के नाम पर वसूली करते ही हैं लेकिन वे अपने शैक्षणिक स्टाफ को भी परेशान करते ही रहते हैं। नियम कहता है कि राज्य के सभी निजी स्कूल प्रबंधकों को अपने शैक्षणिक स्टाफ को सरकारी स्कूलों जैसी सुविधाएं देनी चाहिए लेकिन राज्य भर में गिनती के निजी स्कूल ही इसका पालन करते हैं।
जानकारी के अनुसार दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों (ICSE/CBSE) को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के समान वेतन व सुविधाएँ देना अनिवार्य है। इसके बावजूद राज्य के कई निजी स्कूलों में शिक्षकों को अपेक्षाकृत कम वेतन दिया जा रहा है। शिकायत है कि कुछ स्कूलों में शिक्षकों से नियुक्ति पत्र तक वापस ले लिए जाते हैं जबकि कई स्कूलों में भविष्य निधि (Provident Fund) खाते नहीं खोले जा रहे हैं। इसके अलावा सेवा पुस्तिकाओं का संधारण भी नियमों के अनुरूप नहीं होने की शिकायत है।
छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर निजी विद्यालयों में शिक्षकों के वेतन, भविष्य निधि (PF) और सेवा पुस्तिका से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने इसे गंभीर प्रकृति का विषय बताते हुए सरकार से स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन का दावा है कि कई स्कूलों में शिक्षकों से आठ घंटे कार्य लिया जाता है, परंतु वेतन 8 से 20 हजार रुपये के बीच सीमित है, जो न्यायसंगत नहीं है। साथ ही शपथ पत्रों में किए गए वादों का पालन न होने की बात भी उठाई गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग से अनुरोध किया गया है कि निजी स्कूलों को शिक्षकों को सरकारी स्कूलों के बराबर वेतन देने, नियुक्ति पत्र प्रदान करने, PF खाते खोलने और सेवा पुस्तिकाओं का नियमित संधारण सुनिश्चित करने के लिए सख़्त निर्देश जारी किए जाएँ।
यह मामला अब शिक्षा विभाग और सरकार के समक्ष पहुँच चुका है। यदि शिकायतों की पुष्टि होती है, तो निजी स्कूलों पर नियमानुसार कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनांदगाँव की बात की जाए तो यहाँ जिले की छोडि़ए शहर में ही दर्जन भर से ज्यादा निजी स्कूले हैं। अधिकांश स्कूलों में शैक्षणिक स्टाफ का पीएफ तो कट रहा है लेकिन उनको वेतन बेहद कम दिया जा रहा है। यदि वेतन जितना मिलना चाहिए, उतना दिया जा रहा है तो उसे वापस ले लिया जाता है। दूसरी तरफ कुछ निजी स्कूलों में वेतन ही कम दिया जा रहा है और उनका पीएफ भी नहीं कट रहा है और न ही उन्हें भविष्यनिधि योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
