गरीब बेसहाय महिला को भाजपा नेता ने पहुंचाई मदद
राजनांदगांव। विकास और जनकल्याण की चमकदार तस्वीरों के बीच एक बोलता चित्र कई असहज सवाल खड़े कर रहा है। शहर के अटल आवास क्षेत्र में रहने वाली एक अभावग्रस्त महिला के घर तीन दिन तक चूल्हा नहीं जला। यह दावा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी हकीकत है जो शासन के दावों को कठघरे में खड़ा करती दिखती है।
सोशल मीडिया में साझा की गई तस्वीर में महिला के सामने राशन रखा दिख रहा है। शहर के जागरूक नागरिक कमलेश सिमनकर द्वारा साझा की गई तस्वीर मानो व्यवस्था पर सीधा आरोप है। बताया गया कि महिला को न तो निराश्रित कार्ड मिला, न राशन कार्ड, और न ही महतारी वंदन जैसी योजनाओं का लाभ। सवाल उठता है जब वर्षों तक प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं की गूंज रही, तो यह जरूरतमंद अब तक सिस्टम की नजरों से ओझल कैसे रही?
प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सत्ता के शीर्ष पर रहे डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल और वर्तमान जिम्मेदारियों के बीच यह घटना प्रशासनिक दावों पर आईना बनकर उभरी है। क्या जमीनी अमला योजनाओं की हकीकत से अनजान है, या फिर कागजों में दर्ज सफलता वास्तविक जरूरतों को ढक रही है?
इस बीच समाजसेवी भावेश बैद द्वारा तत्काल राशन उपलब्ध कराए जाने से मानवीय संवेदना की मिसाल जरूर सामने आई, लेकिन यह राहत एक बड़ा प्रश्न छोड़ जाती है। क्या नागरिकों की बुनियादी जरूरतें अब व्यक्तिगत दान और सद्भाव पर निर्भर रहेंगी?
संस्कारधानी और संस्थाओं की नगरी कहलाने वाले राजनांदगांव में यह दृश्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर तीखा प्रहार करता है। जरूरत है कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर स्पष्ट जवाब दें, ताकि योजनाओं के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच की खाई पाटी जा सके।
