शासकीय सेंदरी मिडिल स्कूल में बच्चे खेल खेल में गणित के जटिल सिद्धान्तों को समझ रहे
कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने की नवाचार की तारीफ
राजनांदगाँव। आपने अलग अलग पार्कों या बगीचों का नाम सुना होगा लेकिन मैथ्स पार्क का नाम शायद ही सुना हो।राजनांदगांव जिले के डोगरगढ़ विकास खण्ड के ग्राम सेंदरी के शासकीय हाई स्कूल मे संभवतः प्रदेश का पहला मैथ्स ( गणित) पार्क है जहाँ विद्यार्थी खेल खेल में गणित की जटिल आकृति, सिद्धांत और प्रमेय को आसानी से सीख रहे है। इस पार्क में शून्य के जन्मदाता महान गणितज्ञ रामानुज आर्यभट्ट से लेकर अन्य गणितज्ञों के आविष्कारों और सिद्धांतो को आकृति के माध्यम से ऊकेरा गया है और गणित के कठिन से कठिन प्रश्नों का आसानी से हल करने का तरीका बताया गया है। इसी के साथ ही वैदिक गणित से भी विद्यार्थी रुबरु हो रहे है।
इस मैथ्स पार्क की खास बात यह है कि यहाँ के शिक्षको ने आपस में राशि एकत्र कर खुद के पैसे से इस गणित पार्क को विकसित किया है जिसकी लागत करीब दस लाख रुपये है।मैथ्स पार्क की योजना गणित के शिक्षक गोकुल जंघेल ने तैयार की है। शिक्षक गोकुल जंघेल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में गणित के प्रति रुझान पैदा करने के उद्देश्य से इस गणित पार्क का निर्माण किया गया है।इस नवाचार से विद्यार्थी खेल खेल में गणित को समझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गणित के संकेतो की आकृति बनाकर बेसिक गणित को समझाने का प्रयास किया गया है।
109 की दर्ज संख्या वाले इस हाईस्कूल में पांच शिक्षक अपनी सेवाए दे रहे हैं और कक्षा 9वीं और दसवीं की कक्षा संचालित हो रही है। स्कूल की प्राचार्य किरण मिश्रा ने बताया कि कोरोना काल के दौरान जब शालाए नहीं लगती थीं तब स्कूल के शिक्षको ने इस नवाचार की शुरुआत की है। पहले उन्होंने पर्यावरण संतुलन बनाये रखने पौधरोपण किया जो आज वृक्ष में तब्दील हो गये है। उन्होंने बताया कि कोरोना के चलते बच्चे गणित से दूर हो रहे थे। तब शिक्षकों ने मैथ्स पार्क के निर्माण का सोचा और इसका निर्माण किया है। इसका परिणाम ये हुआ है कि बच्चो में आज गणित के प्रति जागृति हो गई है।
कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने शासकीय स्कूल के शिक्षकों और बच्चों द्वारा किए गए इस नवाचार की प्रसंसा की है और प्रशासन की ओर से स्कूल को यथासंभव मदद करने का आश्वासन दिया है।
पार्क में गणितीय अवधारणाओं को खेल, पहेलियों, मॉडल्स और गतिविधियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। यहां बच्चे सिर्फ गणित पढ़ते नहीं, बल्कि उसे जीते हैं, खेलते हैं, समझते हैं और मज़े लेते हैं। जहां आम तौर पर गणित बच्चों के लिए डर का विषय माना जाता है, वहीं सेंदरी स्कूल में बच्चे गणित को सबसे सरल और आसानी से समझ में आ जाने वाला विषय बताते हैं। छात्र छात्रा निहारिका यादव और उदित नारायण साहू उत्साह से कहते हैं कि अब गणित हमारा फेवरिट सब्जेक्ट है। हम पढ़ते ही नहीं बल्कि इससे खेलते हैं।
ग्राम सेंदरी में स्थित यह सरकारी स्कूल किसी सामान्य शासकीय विद्यालय जैसा बिल्कुल नहीं दिखता। पहली नज़र में ही यह किसी प्रीमियम निजी स्कूल जैसा एहसास कराता है। स्वच्छ परिसर, सुव्यवस्थित कक्षाएं, आधुनिक सुविधाएं और सीखने-सिखाने का नया नजरिया।
स्कूल में अब डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लास और प्रोजेक्ट बेस्ड पढ़ाई को प्राथमिकता दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस स्कूल के अब तक 40 से अधिक बच्चे राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।वही माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड परीक्षा मे
एक बच्चा टाप टेन में अपना नाम दर्ज करा चुका है। बहरहाल सेंदरी गांव के इस सरकारी स्कूल ने यह साबित कर दिया कि नीयत और कोशिश हो तो सीमाएं कभी आड़े नहीं आतीं। यहां के शिक्षकों की लगन और बच्चों के प्रति समर्पण ने शिक्षा को दान, सेवा और नवाचार का स्वरूप दिया है। इस स्कूल की सफलता केवल एक संस्थान की कहानी नहीं, बल्कि पूरे शासकीय स्कूलों के लिए एक मजबूत संदेश है।
