श्री सत्यनारायण मंदिर की प्रसादी वितरित
राजनांदगांव। कामठी लाइन स्थित भगवान सत्यनारायण मंदिर में अन्नकूट प्रसादी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालु भक्त माता बहनें सीधा स्वरूप सूखा अनाज, दाल, चावल, मूंग, आटा, घी, सभी प्रकार के मसाले, अनेक प्रकार की सब्जियां, गुड़, धान्य आदि भगवान को भोग स्वरूप अर्पित करने पहुंची।
भक्तिमय रहा वातावरण
सुबह से भजन-कीर्तन के सुरों से मंदिर परिसर गूंजायमान रहा। भक्तों ने भगवान श्री सत्यनारायण की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। दोपहर 3 बजे श्री सत्यनारायण धर्मशाला से भोग प्रसादी मंदिर ले जाई गई, जहां भगवान श्री सत्यनारायण जी को भोग लगाकर आरती की गई। आरती पश्चात मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित भगवान राधाकृष्ण को भोग प्रसादी के साथ भजन करते हुए श्री सत्यनारायण धर्मशाला ले जाया गया। धर्मशाला में विशाल मंच में भगवान राधाकृष्ण युगल सरकार को विराजित किया गया, श्री हनुमान जी की आरती पश्चात दोपहर 3:30 बजे प्रसादी से श्री सत्यनारायण धर्मशाला से अन्नकूट प्रसादी वितरण का कार्य शुरू हुआ, जो शाम 6:30 बजे तक निरंतर चलता रहा जिसमें लगभग 1000 भक्तों ने लगभग 5000 व्यक्तियों का प्रसाद टिफिनों में ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मशाला के बाहर सैकड़ों भक्तों की लंबी लाइन लग गई। विशेषता यह रही कि वितरण करने वाले स्वयं सेवकों की चुस्ती से किसी भी भक्त को 20 मिनट से अधिक समय नहीं लगा।
स्वादिष्ट प्रसाद की रही चर्चा
प्रसादी में मूंग, चांवल, कढ़ी, मिक्स सब्जी, पुड़ी और मीठी बूंदी परोसी गई। सादगी और स्वाद का संगम झलकता यह प्रसाद भक्तों को बेहद पसंद आया। सभी भक्तों ने इसकी सराहना करते हुए समिति के कार्यों की प्रशंसा की।
इस भव्य आयोजन का सफल संचालन सत्यनारायण मंदिर समिति द्वारा किया गया। समिति के अध्यक्ष अशोक लोहिया, सचिव सुरेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष हरीश अग्रवाल, विष्णु प्रसाद लोहिया, सौरभ खंडेलवाल, पवन लोहिया, श्याम खंडेलवाल, राजेश अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, सौरभ खंडेलवाल, ओमप्रकाश शर्मा, रामावतार जोशी और लक्ष्मण लोहिया सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल रहे। समिति अध्यक्ष अशोक लोहिया ने बताया कि अन्नकूट प्रसादी महोत्सव इस मंदिर की वार्षिक परंपरा है जो लगभग 100 वर्षों से निरंतर जारी है। इस मंदिर प्रसादी की विशेषता यह है कि यहां बिना किसी भेदभाव, ऊंच- नीच या अमीर – गरीब के प्रत्येक नागरिक को एक ही लाइन में लगकर प्रसादी प्राप्त करना होता है। यहां भरपूर प्रसादी वितरण की जाती है। हर वर्ष भक्तों की बढ़ती संख्या इस आयोजन की लोकप्रियता और भगवान के प्रति श्रद्धा को दर्शाती है।
अन्नकूट प्रसादी का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में सेवा, समानता और एकता का संदेश भी देता है। सामूहिक भोजन और प्रसाद वितरण के माध्यम से लोगों ने ‘सबका साथ, सबका मंगल’ की भावना को साकार किया।
