मुनि वीरभद्र ने कहा- साधु का व्यक्तित्व समाज के लिए आदर्श होता है
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि साधु का व्यक्तित्व सागर जैसा धीर गंभीर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु का व्यक्तित्व समाज के लिए आदर्श होता है, इसलिए साधु को मर्यादा का पालन करना चाहिए।
जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि आजकल साधुओं की स्थितियां समय हिसाब से बदल गई है। भौतिक वस्तुओं ने उनके जीवन पर प्रभाव डाला है किंतु पुराने समय में साधुओं का जीवन बहुत ही कठिन था और उनकी साधना उत्कृष्ट थी। समय हिसाब से उनकी साधना की पद्धति बदलती गई और आज के युग में आप जिन साधुओं को देख रहे हैं उनपर आधुनिक युग का प्रभाव नजर आता है।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि आज के साधुओं को तपस्या कर अपनी स्थिति पौराणिक साधुओं के समान करनी चाहिए ताकि पुराने साधुओं जैसा ओजस्वी जीवन प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि हमें अपने में सुधार कर भगवान की आज्ञा का पालन करते हुए जिन शासन का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन के कार्य आगे बढ़ाने के लिए ही कार्य करें। आपके कारण जिन शासन को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। आप संकल्प लें कि गलत कार्यों में सहयोग नहीं करेंगे और साधना करते हुए आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ जायेंगे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।
