ज्ञान वो चाबी है जिससे हम मोक्ष का द्वार खोल सकते हैं- मुनि वीरभद्र
राजनांदगांव। जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि ज्ञान वो चाबी है जिससे हम मोक्ष का द्वार खोल सकते हैं।अगर ज्ञान सच्चा है तो निश्चित तौर पर अवगुण घटेंगे ही घटेंगे। ज्ञान की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि अनुकूल परिस्थिति में ज्ञान के प्रति रुचि हो।
जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि ज्ञान की विराधना बहुत बढ़ती जा रही है। आज हम देखते हैं कि सड़क पर दैनिक पेपर बिखरे पड़े रहते हैं और अनेक लोगों के पैर में आते रहते हैं। इससे ज्ञान का अपमान होता है। इसी तरह खाना खाते-खाते पेपर पढ़ते हैं, इस तरह हम ज्ञान की विराधना बहुत करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम समय की समाधि देने वाला ज्ञानी होता है।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि ज्ञान आए तभी किसी चीज की वैल्यूएशन समझ में आती है। ज्ञान के अभाव के कारण हम धर्म और पाप की तुलना नहीं कर पाते। स्वार्थ, परोपकार और परमार्थ के तीन चीजें मुख्य है। तत्वज्ञान समझ में आए तभी हम परोपकार कर पाएंगे।ज्ञान की विराधना से अपने आपको बचाना चाहिए। शरीर का काम अलग है और आत्मा का काम अलग है।कहीं ना कहीं पूर्व जन्म की साधना का असर होता है जो हमें इस जन्म में कुछ चीजें जल्द याद आ जाती है। ज्ञान अपनी क्रियाओं को प्रभाव व विभाव की दशा से निकाल कर स्वभाव की दशा में लाने काम करता है। उन्होंने कहा कि जो ज्ञान अपने स्वभाव में ना हो,उस ज्ञान का क्या मतलब! उन्होंने कहा कि ज्ञान स्वभाव में होना चाहिए तभी इसका लाभ मिल पाएगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।