राजनांदगांव। पहाड़ों में विराजित मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों को अब न केवल मंदिर की परिक्रमा करने की सुविधा मिलेगी, बल्कि इस पथ में उन्हें छत्तीसगढ़ में विराजित 31 देवियों के दर्शन भी होंगे। वन विभाग द्वारा बनाए गए विभिन्न वन्य प्राणियों और पक्षियों के संरक्षण की दिशा में तैयार किए गए परिक्रमा पथ से इको टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के अलावा देशभर के लाखों लोग हर साल दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र में यहां लगने वाले मेले ने भी राज्य में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसके साथ ही डोंगरगढ़ में प्रज्ञागिरी, चंद्रगिरी और प्रतिभास्थली का निर्माण होने के कारण यहां दर्शनार्थियों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रसाद योजना के तहत जारी की गई राशि से भी यहां विकास काम अंतिम चरणों में चल रहे हैं। इधर राज्य सरकार ने मां बम्लेश्वरी मंदिर की परिक्रमा की नई सुविधा शुरू की गई है। सन 2016 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने परिक्रमा पथ के लिए राशि स्वीकृत की थी। एक दशक बाद यह प्रोजेक्ट हाल ही में पूर्ण किया गया है। परिक्रमा पथ का निर्माण पहाड़ी के चारों ओर किया गया है। डोंगरगढ़ शहर के मध्य में विभिन्न वन्य प्राणियों, जीव-जंतुओ और पक्षियों को प्राकृतिक आवास देने के साथ-साथ ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई इस पहल से दर्शनार्थियों को अब मंदिर परिसर की परिक्रमा करने का भी अवसर मिलेगा।
0 साढ़े तीन किमी का पथ
वन विभाग द्वारा मंदिर की परिक्रमा करते हुए जंगल के बीच से होता हुआ परिक्रमा पथ तैयार किया गया है। जिसकी कुल लंबाई साढ़े तीन किमी है। परिक्रमा पथ के चारों ओर वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए चैनलिंग फेंसिंग का काम भी किया गया है। पहाड़ी की सुंदरता को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रजातियों के दस हजार पौधों का रोपण किया गया है। इससे परिजात वन, चंदन वन, त्रिफला वन, रुद्राक्ष वन और चम्पा वन तैयार किया गया है।
0 देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित
परिक्रमा पथ में छत्तीसगढ़ के प्रमुख देवी-देवताओं की 31 मूर्तियों की भी स्थापना की गई है। परिक्रमा पथ पर दर्शनार्थियों को मां बिलई माता धमतरी, मां महाकाली अडभार जांजगीर-चांपा, मां बंजारी माता रावाभाठा रायपुर, मां अन्नपूर्णा माता शिवरीनारायण, मां जतमई माता गरियाबंद, मां खल्लारी माता महासमुंद, मां अंगारमोती धमतरी, मां भद्रकाली माता बेमेतरा, मां महामाया रतनपुर के साथ ही दंतेश्वरी माता दंतेवाड़ा की प्रतिमाएं शामिल हैं। इसके साथ ही परिक्रमा पथ की दीवारों पर लोककला संस्कृति से जुड़ी चित्रकलाएं भी बनाई गई है।
